गाइड · ऑप्शन का मैकेनिज्म
ऑप्शन ग्रीक्स आसान हिंदी में: Delta, Gamma, Theta, Vega, Rho का मैकेनिज्म
सीधा उत्तर
ऑप्शन ग्रीक्स किसी ऑप्शन के premium की पाँच अलग-अलग संवेदनशीलताएँ हैं, जो Black-Scholes जैसे मॉडल से निकलती हैं। Delta underlying की ₹1 चाल के प्रति संवेदनशीलता है (call के लिए लगभग 0 से 1, put के लिए 0 से -1), और वही ITM में समाप्त होने की मोटी प्रायिकता का proxy भी है। Gamma Delta के बदलने की दर है; Theta हर दिन का समय-क्षय; Vega implied volatility के प्रति संवेदनशीलता; और Rho ब्याज दर के प्रति। इन्हीं की वजह से एक बायर दिशा में सही होकर भी Theta और Vega से हार सकता है।
ग्रीक्स कोई रणनीति नहीं, बल्कि उस मशीनरी का नक़्शा हैं जो ऑप्शन के premium को हिलाती है। ज़्यादातर हिंदी-माध्यम सामग्री ऑप्शन को "call ख़रीदो, ऊपर जाएगा तो कमाओगे" जैसी सरल दिशा-कहानी बना देती है, और यही सबसे बड़ा जाल है। सच यह है कि ऑप्शन का दाम एक साथ कई बलों का जोड़ है: underlying की चाल, बीतता समय, और volatility। इनमें से हर बल का अपना ग्रीक है। यह पृष्ठ पाँचों ग्रीक्स को एक-एक करके, उनके मैकेनिज्म से खोलता है, और फिर वह ईमानदार निष्कर्ष देता है जिसे अधिकांश गाइड छोड़ देती हैं: एक ऑप्शन बायर एक साथ तीन मोर्चों से लड़ता है, और सही दिशा उनमें से केवल एक है।
Delta: underlying की चाल के प्रति संवेदनशीलता
Delta सबसे बुनियादी ग्रीक है, और यह दो चीज़ें एक साथ बताती है। पहली, संवेदनशीलता: Delta यह मापती है कि underlying (मान लीजिए कोई इंडेक्स या शेयर) की कीमत ₹1 हिलने पर ऑप्शन का premium कितना बदलेगा। एक call का Delta लगभग 0 से 1 के बीच होता है, और एक put का 0 से -1 के बीच, क्योंकि underlying के ऊपर जाने पर call महँगी और put सस्ती होती है। यदि किसी call का Delta 0.50 है, तो underlying के ₹1 ऊपर जाने पर उसका premium लगभग ₹0.50 बढ़ता है, बशर्ते बाक़ी ग्रीक्स को स्थिर मान लें।
दूसरी, Delta एक मोटी प्रायिकता का proxy भी है। 0.50 के Delta को अक्सर इस रूप में पढ़ा जाता है कि ऑप्शन के ITM (in-the-money) में समाप्त होने की संभावना लगभग 50% है। यह कोई सटीक प्रायिकता नहीं, पर एक उपयोगी सन्निकटन है। इसी से Delta का व्यवहार समझ आता है: एक ATM (at-the-money) ऑप्शन का Delta लगभग 0.50 होता है (कीमत ठीक स्ट्राइक पर, दोनों ओर बराबर संभावना); एक deep ITM ऑप्शन का Delta ~1 होता है (वह लगभग underlying की तरह ही चलता है); और एक deep OTM (out-of-the-money) ऑप्शन का Delta ~0 होता है (जब तक underlying बड़ी चाल न दिखाए, वह शायद ही हिलता है)।
व्यावहारिक निहितार्थ यह है कि position का असली exposure केवल चुकाए गए premium से नहीं, बल्कि Delta से समझना चाहिए। दो ऑप्शन जिनका premium एक जैसा हो, पर Delta अलग हो, underlying की उसी चाल पर बहुत अलग व्यवहार करेंगे। यही समझ किसी भी ऑप्शन-चेन को सही पढ़ने की बुनियाद है, और इसे विस्तार से ऑप्शन चेन कैसे पढ़ें में देखा जा सकता है।
Gamma: Delta के बदलने की दर
यदि Delta वक्र की ढलान है, तो Gamma उस ढलान के बदलने की दर है, यानी सरल शब्दों में "Delta का Delta"। Gamma मापती है कि underlying की ₹1 चाल पर Delta ख़ुद कितना बदलेगा। यह अकेली संख्या नहीं दिखती, पर यही तय करती है कि आपका Delta कितना स्थिर है या कितनी तेज़ी से खिसक रहा है। एक महत्वपूर्ण तथ्य: long ऑप्शन का Gamma हमेशा धनात्मक होता है, चाहे वह call हो या put, क्योंकि Gamma दिशा नहीं, दर मापती है।
Gamma ATM पर और expiry के पास सबसे अधिक होती है, और deep ITM या deep OTM में कम। कारण सहज है: ATM पर ऑप्शन "इस पार या उस पार" के कगार पर होता है, इसलिए underlying की छोटी चाल भी उसकी ITM-संभावना को, और इसलिए Delta को, तेज़ी से बदल देती है। यही expiry के पास और तीखा हो जाता है, जब कुछ ही अंकों की चाल Delta को 0.5 से 0 या 1 की ओर झटके से ले जा सकती है।
यहीं एक राइटर (option seller) का असली जोखिम छिपा है। बेची गई (short) पोज़िशन का Gamma ऋणात्मक होता है। इसका अर्थ है कि जब बाज़ार राइटर के विरुद्ध जाता है, तो उसका Delta भी उसके विरुद्ध तेज़ी से बढ़ता है, यानी नुक़सान रैखिक नहीं, त्वरित गति से बढ़ता है। इसीलिए expiry के दिन ATM के पास बेची गई पोज़िशन अचानक तेज़ी से बिगड़ सकती है: वहाँ Gamma सबसे ऊँची होती है, और short-gamma राइटर उसकी पूरी मार झेलता है।
Theta: हर दिन का समय-क्षय
Theta वह ग्रीक है जो समय को क़ीमत में बदलती है। यह मापती है कि, बाक़ी सब स्थिर रहते हुए, एक कारोबारी दिन बीतने पर ऑप्शन का premium कितना समय-मूल्य खोएगा। किसी ऑप्शन का premium दो हिस्सों से बनता है: intrinsic value (जितना वह अभी ITM है) और time value (भविष्य में और चलने की संभावना का दाम)। Theta इसी दूसरे हिस्से को हर दिन थोड़ा-थोड़ा काटती है, क्योंकि जैसे-जैसे expiry पास आती है, "और चलने" के लिए बचा समय घटता जाता है।
दिशा साफ़ है: Theta एक बायर के विरुद्ध और एक राइटर के पक्ष में काम करती है। जो long है वह हर बीतते दिन premium का एक हिस्सा चुपचाप खोता है; जो short है वह वही समय-मूल्य कमाता है। पर सबसे ज़रूरी बात यह है कि यह क्षय रैखिक नहीं है। expiry जैसे-जैसे पास आती है, ATM ऑप्शन का समय-मूल्य बढ़ती दर से गिरता है, यानी आख़िरी कुछ दिनों में Theta सबसे तेज़ काटती है। इसीलिए बायर के लिए "देर से सही होना" अक्सर "हार जाना" होता है: चाल भले सही दिशा में आए, यदि वह पर्याप्त तेज़ी से नहीं आई, तो समय-क्षय Delta के लाभ को खा जाता है।
Vega: implied volatility के प्रति संवेदनशीलता
Vega मापती है कि implied volatility (IV) के 1 अंक बदलने पर ऑप्शन का premium कितना बदलेगा। IV वह बाज़ार-अनुमानित अस्थिरता है जो ऑप्शन के दाम में बँधी होती है: जितना बाज़ार भविष्य में बड़ी चाल की आशंका करता है, उतनी ऊँची IV, और उतना महँगा हर ऑप्शन। एक long ऑप्शन का Vega धनात्मक होता है, यानी IV ऊँची होने पर premium बढ़ता है और IV गिरने पर घटता है। Vega भी ATM ऑप्शन में सबसे अधिक होती है और deep ITM या OTM में कम। IV और Vega का पूरा तंत्र implied volatility क्या है में और गहराई से समझाया गया है।
यहीं ऑप्शन बायर का सबसे धोखेबाज़ जाल है, जिसे IV crush कहते हैं। किसी निर्धारित घटना, जैसे नतीजे या कोई नीति-घोषणा, से ठीक पहले बाज़ार अनिश्चितता के कारण IV को फुला देता है, इसलिए ऑप्शन महँगे हो जाते हैं। घटना बीतते ही अनिश्चितता ख़त्म हो जाती है और IV तेज़ी से गिर जाती है। तब एक बायर दिशा में सही होकर भी हार सकता है: यदि underlying सही ओर तो चला, पर उतना नहीं, तो IV के गिरने से हुआ नुक़सान Delta के छोटे लाभ से बड़ा हो जाता है, और शुद्ध परिणाम हानि रहता है। यह ग्रीक्स की सबसे कठोर सीख है, कि सही अनुमान भी ग़लत Greek-स्थिति में पैसे गँवा सकता है।
Rho: ब्याज दर के प्रति संवेदनशीलता
Rho मापती है कि ब्याज दर के 1 अंक बदलने पर ऑप्शन का premium कितना बदलेगा। Call का Rho धनात्मक और put का ऋणात्मक होता है, क्योंकि ऊँची ब्याज दर धारण-लागत के गणित को बदलती है। पाँचों में यह व्यवहार में सबसे कम महत्वपूर्ण ग्रीक है, ख़ासकर कम अवधि वाले ऑप्शन में, क्योंकि कुछ दिनों या हफ़्तों में ब्याज दर शायद ही बदलती है। Rho का असर मुख्यतः लंबी अवधि वाले ऑप्शन में ध्यान देने योग्य होता है।
इसलिए भारतीय रिटेल की अल्पकालिक ऑप्शन गतिविधि में तीन ग्रीक्स प्रमुख रहती हैं, Delta, Theta और Vega, और Rho को संक्षेप में जान लेना पर्याप्त है। इसे पूरी तरह अनदेखा करना भी सही नहीं, पर इसे रोज़मर्रा के छोटे-अवधि निर्णयों का केंद्र बनाना ग़लत प्राथमिकता है। ग्रीक्स की पूरी तस्वीर के लिए अगला भाग पाँचों को एक तालिका में समेटता है।
पाँचों ग्रीक्स एक नज़र में
ग्रीक्स को अलग-अलग याद रखने से बेहतर है उन्हें एक साथ देखना, क्योंकि किसी भी पोज़िशन पर वे एक साथ काम करती हैं। नीचे की तालिका हर ग्रीक का सार, और उसका असर एक बायर बनाम एक राइटर पर, एक जगह रखती है।
| ग्रीक | यह क्या मापती है | बायर (long) पर असर | राइटर (short) पर असर |
|---|---|---|---|
| Delta | underlying की ₹1 चाल पर premium का बदलाव; ITM-प्रायिकता का proxy | दिशा सही होने पर लाभ का मुख्य स्रोत | विपरीत दिशा में हानि का स्रोत |
| Gamma | Delta के बदलने की दर; ATM और expiry पर सबसे अधिक | चाल तेज़ होने पर Delta पक्ष में तेज़ी से बढ़ता है | ऋणात्मक gamma: विपरीत चाल में जोखिम त्वरित |
| Theta | हर दिन का समय-क्षय; expiry के पास त्वरित | विरुद्ध: हर दिन premium घटता है | पक्ष में: समय-मूल्य कमाता है |
| Vega | IV के 1 अंक बदलने पर premium का बदलाव | विरुद्ध: IV crush में दिशा सही पर भी हानि | पक्ष में: IV गिरने पर लाभ |
| Rho | ब्याज दर के 1 अंक पर premium का बदलाव | अल्प-अवधि में नगण्य | अल्प-अवधि में नगण्य |
तालिका का एक पैटर्न तुरंत दिखता है: Theta और Vega के स्तंभ में बायर और राइटर के रंग उलटे हैं। यही ऑप्शन का असली संतुलन है, और अगला भाग इसी को खोलता है।
Delta और Gamma: ATM बनाम ITM/OTM
Delta और Gamma दोनों इस बात पर निर्भर करते हैं कि ऑप्शन स्ट्राइक के कितने पास या दूर है। एक ही सिद्धांत को अलग-अलग स्थिति में देखने से यह साफ़ हो जाता है कि ATM ऑप्शन सबसे "जीवंत" क्यों होते हैं, और deep ITM या OTM सबसे "शांत" क्यों।
| स्थिति | Delta (call, लगभग) | Gamma | व्यावहारिक अर्थ |
|---|---|---|---|
| Deep OTM | ~0.05 | कम | Delta लगभग शून्य; underlying की बड़ी चाल तक premium शायद ही हिलता है |
| ATM | ~0.50 | सबसे अधिक | Delta तेज़ी से बदलता है; ऑप्शन सबसे संवेदनशील, ख़ासकर expiry के पास |
| Deep ITM | ~1.00 | कम | ऑप्शन लगभग underlying की तरह चलता है; Delta स्थिर, समय-मूल्य कम |
यही कारण है कि expiry के दिन ATM स्ट्राइक के आसपास premium अचानक तेज़ी से हिलते हैं: वहाँ Gamma चरम पर होती है, इसलिए underlying की छोटी चाल भी Delta को झटके से बदल देती है। एक बायर के लिए यह त्वरण मौक़ा और जोखिम दोनों है; एक राइटर के लिए यह वही ऋणात्मक-gamma पूँछ है जो अल्प समय में बड़ा नुक़सान बना सकती है।
Theta और Vega: expiry और घटनाओं के आसपास
Theta और Vega समय और volatility के ग्रीक्स हैं, और दोनों का व्यवहार expiry तथा निर्धारित घटनाओं के आसपास सबसे नाटकीय होता है। नीचे की तालिका इन दो अवस्थाओं में उनके असर को अलग करती है।
| स्थिति | Theta का व्यवहार | Vega / IV का व्यवहार | बायर के लिए संकेत |
|---|---|---|---|
| expiry के पास | समय-क्षय तेज़; आख़िरी दिनों में सबसे अधिक | Vega घटती है; IV का असर सिमटता है | देर से सही होना अक्सर हार; timing ज़रूरी |
| घटना से पहले | क्षय जारी, पर IV की छाया में छिपा | IV फूली हुई; premium महँगा | महँगी IV के लिए अधिक premium चुकाना |
| घटना के बाद | क्षय सामान्य गति पर लौटता है | IV crush: IV तेज़ी से गिरती है | दिशा सही होकर भी IV-हानि संभव |
दोनों तालिकाएँ मिलकर एक ही बात कहती हैं: ऑप्शन का दाम कभी अकेले दिशा से तय नहीं होता। एक ही "call ऊपर जाएगी" वाली सोच, अलग Greek-स्थिति में, लाभ भी दे सकती है और हानि भी। यही वह जगह है जहाँ ऊपरी विश्लेषण, यानी सही स्ट्राइक, सही समय और IV की स्थिति का आकलन, निर्णय को बदल देता है, और हम जिस पद्धति की शिक्षा देते हैं उसका केंद्र यही ऊपरी काम है, न कि केवल दिशा का अनुमान।
ईमानदार निष्कर्ष: बायर बनाम राइटर
अब सबसे ज़रूरी संश्लेषण। ग्रीक्स को एक-एक करके समझने के बाद, असली सीख उनके जोड़ में है। एक ऑप्शन बायर एक साथ तीन मोर्चों से लड़ता है: Theta हर दिन उसका premium काटती है, Vega का जोखिम है कि किसी घटना के बाद IV गिर जाए, और Delta तभी काम आता है जब चाल पर्याप्त बड़ी और समय पर हो। इसका अर्थ है कि बायर को केवल दिशा नहीं, बल्कि दिशा, गति और timing तीनों एक साथ चाहिए। इसके बदले उसका जोखिम सीमित रहता है, अधिकतम चुकाया गया premium।
एक राइटर (option seller) इसका ठीक उल्टा है। वह Theta कमाता है और IV गिरने पर Vega से लाभ पाता है, इसलिए "समय उसके पक्ष में" है। पर इसकी क़ीमत है ऋणात्मक Gamma: जब बाज़ार तेज़ी से उसके विरुद्ध जाता है, उसका नुक़सान त्वरित गति से बढ़ता है, और यही tail-जोखिम उसके पास रहता है। संक्षेप में, बायर समय और volatility से लड़ता है; राइटर उन्हें कमाता है पर gamma की पूँछ ढोता है। न कोई पक्ष "मुफ़्त का लाभ" है, न कोई निश्चित रूप से बेहतर; दोनों अलग जोखिम-प्रोफ़ाइल हैं। राइटिंग के इसी जोखिम-पक्ष को विस्तार से ऑप्शन सेलिंग और जोखिम-प्रबंधन में देखा जा सकता है।
इसीलिए ग्रीक्स को रणनीति से पहले समझना चाहिए, बाद में नहीं। किसी भी ऑप्शन-पोज़िशन का असली स्वरूप उसके ग्रीक्स में लिखा होता है, और यह जाने बिना कि आपका Theta, Vega और Gamma किस ओर हैं, "call बनाम put" जैसा बुनियादी चुनाव भी अधूरा रह जाता है। call और put की तुलना का आधार भी यही मैकेनिज्म है, जिसे call ऑप्शन बनाम put ऑप्शन में देखा जा सकता है। ग्रीक्स कोई उन्नत विषय नहीं; वे ऑप्शन का व्याकरण हैं।
आम सवाल
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ऑप्शन ग्रीक्स क्या हैं?
+ग्रीक्स किसी ऑप्शन के premium की पाँच अलग संवेदनशीलताएँ हैं, जो Black-Scholes जैसे मॉडल से निकलती हैं। Delta बताती है कि underlying की ₹1 चाल पर premium कितना बदलेगा; Gamma बताती है कि Delta कितनी तेज़ी से बदल रही है; Theta बताती है कि हर दिन समय-क्षय से कितना मूल्य घटता है; Vega बताती है कि implied volatility के 1 अंक बदलने पर premium कितना बदलेगा; और Rho ब्याज दर के प्रति संवेदनशीलता है। ये मिलकर तय करती हैं कि दिशा सही होने पर भी आप जीतेंगे या हारेंगे।
Delta का व्यावहारिक अर्थ क्या है?
+Delta दो चीज़ें एक साथ बताती है। पहली, संवेदनशीलता: 0.50 Delta वाली call में underlying के ₹1 ऊपर जाने पर premium लगभग ₹0.50 बढ़ता है (बाक़ी ग्रीक्स स्थिर मानकर)। Call का Delta लगभग 0 से 1, put का 0 से -1 होता है। दूसरी, एक मोटी प्रायिकता का proxy: 0.50 Delta को अक्सर लगभग 50% संभावना के रूप में पढ़ा जाता है कि ऑप्शन ITM में समाप्त होगा। ATM ऑप्शन का Delta लगभग 0.50, deep ITM का लगभग 1, deep OTM का लगभग 0 होता है।
Gamma क्यों मायने रखती है?
+Gamma, Delta के बदलने की दर है, यानी Delta का Delta। यह ATM पर और expiry के पास सबसे अधिक होती है, और deep ITM या deep OTM में कम। इसका मतलब है कि ATM ऑप्शन में underlying की छोटी चाल भी Delta को तेज़ी से बदल देती है। एक राइटर (option seller) का gamma ऋणात्मक होता है, इसलिए बाज़ार उसके विरुद्ध जाने पर उसका जोखिम रैखिक नहीं, त्वरित गति से बढ़ता है। यही कारण है कि expiry के दिन ATM के पास बेची गई पोज़िशन अचानक तेज़ी से बिगड़ सकती है।
Theta decay क्या है और किसके ख़िलाफ़ काम करती है?
+Theta हर बीतते दिन के साथ ऑप्शन के premium में होने वाला समय-क्षय है। एक long ऑप्शन का समय-मूल्य रोज़ थोड़ा घटता है, इसलिए Theta बायर के विरुद्ध और राइटर के पक्ष में काम करती है। यह क्षय रैखिक नहीं है: expiry जैसे-जैसे पास आती है, ATM ऑप्शन का समय-मूल्य बढ़ती दर से गिरता है, यानी आख़िरी दिनों में Theta सबसे तेज़ काटती है। इसीलिए बायर को न केवल दिशा, बल्कि timing भी सही चाहिए: देर से सही होना अक्सर हार जाता है।
Vega और IV crush क्या है?
+Vega बताती है कि implied volatility (IV) के 1 अंक बदलने पर premium कितना बदलेगा। Long ऑप्शन का Vega धनात्मक होता है, इसलिए IV ऊँची होने पर premium महँगा होता है। समस्या यह है कि किसी निर्धारित घटना, जैसे नतीजे या नीति-घोषणा, से पहले IV फूल जाती है और घटना बीतते ही तेज़ी से गिर जाती है। इसे IV crush कहते हैं। तब एक बायर दिशा में सही होकर भी हार सकता है, क्योंकि IV के गिरने से हुआ नुक़सान Delta के लाभ से बड़ा हो जाता है।
Rho कितनी महत्वपूर्ण है?
+Rho ब्याज दर के 1 अंक बदलने पर premium के बदलने को मापती है। Call का Rho धनात्मक, put का ऋणात्मक होता है। व्यवहार में यह सबसे कम महत्वपूर्ण ग्रीक है, ख़ासकर कम अवधि वाले ऑप्शन में, क्योंकि कुछ दिनों या हफ़्तों में ब्याज दर शायद ही बदलती है। इसका असर लंबी अवधि वाले ऑप्शन में ही ध्यान देने योग्य होता है। भारतीय रिटेल की अल्पकालिक ऑप्शन गतिविधि में प्रमुख ग्रीक्स Delta, Theta और Vega रहती हैं, Rho नहीं।
क्या एक ऑप्शन बायर दिशा में सही होकर भी हार सकता है?
+हाँ, और यही ग्रीक्स की सबसे ज़रूरी सीख है। एक बायर एक साथ तीन मोर्चों से लड़ता है: Theta हर दिन premium काटती है, Vega का जोखिम है कि घटना के बाद IV गिर जाए, और Delta तभी काम आता है जब चाल पर्याप्त बड़ी और समय पर हो। यदि underlying सही दिशा में पर धीरे चला, या घटना के बाद IV गिर गई, तो समय-क्षय और IV crush मिलकर Delta के लाभ को खा सकते हैं। इसलिए बायर को दिशा, गति और timing तीनों चाहिए।
बायर और राइटर पर ग्रीक्स का असर कैसे अलग है?
+बायर और राइटर आमने-सामने हैं। बायर का Theta ऋणात्मक (हर दिन क्षय) और Vega धनात्मक (IV गिरने पर हानि) होता है, पर उसका जोखिम सीमित रहता है, अधिकतम चुकाया गया premium। राइटर इसके उलट Theta कमाता है और IV गिरने पर लाभ पाता है, पर उसका gamma ऋणात्मक होता है, इसलिए तेज़ विपरीत चाल में उसका जोखिम त्वरित गति से बढ़ता है और tail-जोखिम बड़ा होता है। संक्षेप में, बायर समय और volatility से लड़ता है; राइटर उन्हें कमाता है पर gamma की पूँछ ढोता है।
तथ्य कहाँ से आते हैं
स्रोत
- ग्रीक्स की परिभाषाएँ। ग्रीक्स Black-Scholes मॉडल से निकली संवेदनशीलताएँ हैं: Delta underlying के प्रति, Gamma Delta की दर, Theta समय के प्रति, Vega volatility के प्रति, Rho ब्याज दर के प्रति। en.wikipedia.org
- Delta की सीमा और प्रायिकता-proxy। long call का Delta 0 से 1, long put का 0 से -1; ATM ऑप्शन का Delta लगभग 0.50; Delta को अक्सर ITM में समाप्त होने की मोटी प्रायिकता का proxy माना जाता है।
- Gamma और short-gamma जोखिम। Gamma सभी long ऑप्शन के लिए धनात्मक, और ATM तथा expiry के पास सबसे अधिक होती है; short ऑप्शन (राइटर) का gamma ऋणात्मक होता है, इसलिए विपरीत चाल में जोखिम त्वरित गति से बढ़ता है।
- IV crush और Vega जोखिम। किसी निर्धारित घटना के बाद implied volatility के तेज़ी से गिरने से long ऑप्शन का मूल्य घट सकता है, भले दिशा सही हो; यह Vega जोखिम का परिणाम है।
- रिटेल डेरिवेटिव घाटे का आँकड़ा। SEBI का इक्विटी-डेरिवेटिव अध्ययन (जुलाई 2025): FY25 में 91% व्यक्तिगत डेरिवेटिव ट्रेडरों को शुद्ध घाटा, कुल मिलाकर लगभग ₹1,05,603 करोड़। sebi.gov.in